28/11/2017
कांग्रेस का पटेलों को आरक्षण देने का क्या फार्मूला है स्पष्ट क्यों नहीं करती ?

गुजरात में विधानसभा का चुनावी घमासान धीरे -धीरे बढ़ता जा रहा है।कांग्रेस यहां जातिवादी जहर फैलाकर चुनावी लाभ उठाना चाहती है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य होने के कारण लगता नहीं की वो अपने मंसूबे में कामयाब हो पाएगी। इस चुनाव में भाजपा पुरे लाव -लश्कर के साथ उतर चुकी है और किसी भी तरह की कमी वो नहीं छोड़ना चाहती है। पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने के नाम पर हार्दिक पटेल कांग्रेस की नाव में सवार हो चुके हैं और इस बात का दावा करते घूम रहे हैं की इस बार गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनेगी और पटेल समुदाय को आरक्षण देगी। अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस कैसे पटेल समुदाय को आरक्षण देगी क्योंकि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है ? कांग्रेस को और विशेष रूप से इसके युवराज राहुल गाँधी को इस बात का जवाब देना ही चाहिए कि आरक्षण देने का उनका फार्मूला क्या है ?

कांग्रेस के नेताओं को शायद यह मति भ्रम हो गया है कि गुजरात की जनता उनके जातिवादी कार्ड में आकर उनकी चुनावी नैया पर लगा देगी। प्रधानमंत्री मोदी भी चुनावी दंगल में कूद चुके हैं और उन्होंने इस चुनाव को गुजरात से बाहर निकाल कर भाजपा को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर लड़ने का फार्मूला थमा दिया है। मोदी के आगे राहुल और उनके नए खेवनहार बने हार्दिक पटेल बहुत ही बौने साबित हो रहे हैं।मजेदार बात  तो यह है कि चुनावी रणनीति में माहिर मोदी और अमित शाह कांग्रेस को घेरकर अपने हिसाब से चुनावी दंगल खेलना चाहते हैं और कांग्रेस न चाहते हुए भी इस घेराबंदी में आ चुकी है। कांग्रेस के पास न तो कोई ऐसे नेता हैं जो भाजपा के नेताओं की फ़ौज के आगे टिक सकें और न ही कोई स्पष्ट रणनीति उनके पास दिखाई दे रही है।राजनितिक रूप से अपरिपक्व और  अपनी बेवकूफी भरे बयान देने में माहिर राहुल गाँधी को भी अब खुद को हिन्दू हितैषी दिखाने को मोदी मजबूर कर  चुके हैं।

                गुजरात के चुनाव इस बार भी मोदी के इर्द -गिर्द ही रहनेवाले हैं। पाकिस्तानी आतंकवादी हाफिज सईद की रिहाई पर राहुल गाँधी का पी एम मोदी पर किया गया व्यंग अब कांग्रेस की गले की फ़ांस बनता जा रहा है। हमेशा मुस्लिम तुष्टिकरण की निति को अपनाये रखनेवाली कांग्रेस हिन्दुओं वोटों को हथियाने के लिए जातिवादी विष घोलकर अपना उल्लू सीधा करने के षड्यंत्र में लगी हुयी है। पटेल आंदोलन के समय हार्दिक पटेल के साथ रहनेवाले कई युवा उससे अलग हो चुके हैं। पट्टीदारों और दलितों को अपनी ओर खींचने की फ़िराक में लगी कांग्रेस यह भूल रही है कि अब हिन्दू समुदाय उसको अच्छी तरह से पहचान चुका और वः उसकी तोड़फोड़ की बातों में फँसनेवाला नहीं है। कांग्रेस के  किसी भी षड्यंत्र को गुजरात की जनताइस बार भी कामयाब नहीं होने देगी क्योंकि उसकी असली फितरत को अब वो भली -भांति जान चुकी है। देश और समाज को तोड़कर अपना राजनैतिक उल्लू को सीधा करने की कांग्रेसी की निति अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। 

गुजरात की जनता को इस बात का गर्व है कि उनके राज्य का नेता देश का प्रधानमंत्री हैं और वह कभी भी ऐसा काम नहीं करेगी कि उनकी वजह से उनके प्रधानमंत्री को नीचा देखना पड़े। राजनीती के माहिर खिलाडी मोदी भी इस बात को भली -भांति समझते हैं।कांग्रेस का अपरिपक्व नेतृत्व किसी भी तरह से इस चुनावी समर को जीतने में कामयाब नहीं हो सकता क्योंकि जनता मोदी के अब तक के कार्यों से संतुष्ट दिखाई देती है। मोदी सरकार के लगभग साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में किसी तरह का कोई भ्रष्टाचार का कोई मामला अभी तक सामने न आना भी मोदी के दामन को पाक - साफ साबित करता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के दामन पर भ्रष्टाचार और घोटालों के असंख्य दाग हैं जो किसी भी तरह से न तो धुल पाए हैं और न ही जनता उनको भूल पायी है। [अश्विनी भाटिया ] 



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कांग्रेस का पटेलों को आरक्षण देने का क्या फार्मूला है स्पष्ट क्यों नहीं करती ?

गुजरात में विधानसभा का चुनावी घमासान धीरे -धीरे बढ़ता जा रहा है।कांग्रेस यहां जातिवादी जहर फैलाकर चुनावी लाभ उठाना चाहती है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य होने के कारण लगता नहीं की वो अपने मंसूबे में कामयाब हो पाएगी। इस चुनाव में भाजपा पुरे लाव -लश्कर के साथ उतर चुकी है और किसी भी तरह की कमी वो नहीं छो