09/09/2017
अवैध उगाही से करोड़ोंपति बने बेलदारों के आगे पु.दि. न. नि. प्रशासन पंगु क्यो ?

शाहदरा /दिल्ली। अफ़सोस की बात है कि हर बात की जानकारी होने के बाद भी पूर्वी दिल्ली नगर निगम शासन और प्रशासन में आसीन अधिकारियों के कानों पर अभी तक जूँ नहीं रेंगी है। अभी तक वार्डों में अवैध भवन निर्माणों से ऊगाही के काम को करने में लगे अवैध निगम कर्मियों को नहीं हटाया गया है।

यह अवैध निगमकर्मी मजे से खुद और अपने साथियों के साथ मोटी रकमें उगाहने में लगें हुएे हैँ।  शाहदरा दक्षिनी और शाहदरा उत्तरी जोन में भवन विभाग में कार्य कर रहे अवैध बेलदारों और अन्य कर्मियों को हटाने को न तो निगम का प्रशासन और न ही निगम पार्षद ही तैयार दिखाई देते हैँ .इस बात  से अवैध धन्धे को संरक्षण देनेवालों की मानसिकता को भलि भांति समझा जा सकता है। मेयर महोदया के कार्यालय से भी कोई कार्यवाही न होना अच्छा संकेत नहीं है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि उनके अपने गीता कालोनी वार्ड में भी महेश कुमार नाम का बेलदार पिछले लम्बे समय से अवैध निर्माणों से उगाही करने में लगा हुआ  है। इससे निगम की कार्य प्रणाली को सहज ही समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काले धन के विरुद्ध छेड़े गए अभियान पर उन्ही की पार्टी के निगम प्रशासन को चला रहे निगम पार्षदों की कोई अहमियत नहीं है। 

आज भी लक्षमी नगर में पिछले कई वर्षो से विनोद नामका एक निगमकर्मी अवैध निर्माण से ऊगाही करके उच्च अधिकारियों और अपने राजनैतिक  आकायों तक पहुँचाने में लगा हुआ  है। बताया जाता है कि त्यागी ना होते हुएे भी खुद को विनोद त्यागी कहने वाले इस निगमकर्मी के आगे पूरा निगम प्रशासन नत मस्तक है .इस कर्मी की ड्यूटी किसी दुसरे स्थान पर है लेकिन किसी की भी बड़े अधिकारी में इतनी  हिम्मत नहीं जोकि  इस चतुर्थ श्रेणी के कर्मी के विरुध कोई कदम उठा सकें। बताया जाता है कि इसने पश्चिमी यू पी स्थित अपने गांव और उसके आस -पास अन्य क्षेत्रों में  करोडों रूपये की चल -अचल सम्पति के एकत्र कर रखी है जिसमे बेनामी सम्प्पति भी शामिल है। करोड़ों की सम्पति के  मालिक बन चुके इस निम्न् श्रेणी के कर्मचारी के विरुध कौनसा उच्च श्रेणी का अधिकारी कार्यवाही करेगा देखने की बात है।

इसी तरह से गीता कालोनी में महेश कुमार ,कृष्णा नगर में सचिन और अशोक कुमार ,शाहदरा में सुरेंद्र कुमार भी इसी काम में बेखोंफ लगें हैँ और निगम प्रशासन इनके सामने पंगु बना हुआ  हैँ। अवैध उगाही से करोड़ों की सम्पति की नामी - बेनामी की सम्पति के स्वामी इन बेलदारों की उच्च स्तरीय जाँच हो तो यहां भी जमे कई यादव सिंह बेनकाब हो सकते हैं। मजेदार बात यह है कि कुछ माह पहले सम्पन्न हुए दिल्ली की तीनों नगर निगमों के चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा हाईकमान ने पिछली बार के लगभग सभी निगम पार्षदों को चुनाव में खड़ा नहीं किया था और निगम को स्वच्छ और भ्रष्टाचार रहित बनाने की सोच से नए लोगों को चुनाव लड़वाया। अच्छी बात यह हुयी कि दिल्ली की जनता ने भी पार्टी के इस निर्णय पर अपनी मोहर लगा दी और तीनो निगमों में भाजपा को सत्ता सौंप दी। अफ़सोस इस बात का है कि कुछ महीनों में ही निगमों में जीत कर आये नए पार्षदों ने भी अपने पूर्वर्ती पार्षदों की राह पर चलना ही अच्छा समझा और न तो निगमों से भ्रष्टाचार समाप्त हो पाया और न ही भ्रष्टतंत्र  पर कोई लगाम कसी जा सकी। 



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