26/07/2020
दिल्ली सिविल डिफेंस में शामिलआप के वर्करों की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

दिल्ली(अश्विनी भाटिया) /विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जब भी वजूद में आई तब ही उसने दिल्ली सिविल डिफेंस में बड़ी संख्या में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भर्ती किया। पिछले7-8 वर्षों में दिल्ली सिविल डिफेंस में की गई इस पूरी भर्ती की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस बात की पूरी संभावना है कि आप की सरकार ने दिल्ली सिविल डिफेंस में को वायलेंटियर शामिल किए हैं,उनमें से अधिकांश आप पार्टी के वर्कर ही हैं। जानकर सूत्रों का कहना तो यह भी है कि सिविल डिफेंस के नाम पर आप पार्टी ने एक वर्दीधारी फोर्स बनाकर अपनी राजनैतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है। यह फोर्स वेतन तो सरकार से पाती है और इसकी निष्ठा आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई है। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि इसीलिए पश्चिमी दिल्ली सब-डिवीजन कार्यालय में तैनात सिविल डिफेंस के जिस वायलेंटियर की कोरोना संक्रमण से मौत हुई, उसको केजरीवाल ने सरकारी खजाने से एक करोड़ रुपए की सहायता राशि उसके घर वालों को दी। अब सवाल यह उठना आवश्यक है कि क्या सिविल डिफेंस कानूनी रूप से सशस्त्र पुलिस या अर्धसैनिक बल की श्रेणी में आता है जो उसके वयलेंटियर को पुलिस फोर्स के कर्मी की तरह इतनी बड़ी सहायता राशि सरकारी खजाने से दी गई? दिल्ली में सरकारी और अनुबंधित बसों में मार्शल लगाने की आढ़ में भी चुन -चुनकर आप के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की ही भर्ती की गई है। इस तरह से आप ने एक तीर से कई निशाने किए और अपना राजनैतिक उल्लू भी सीधा कर लिया। इससे एक तो जिस कार्यकर्त्ता को नौकरी मिली वह खुश हो गया और दूसरे वह और उसका परिवार हमेशा के लिए पार्टी निष्ठावान हो गया।अधिकांश दिल्ली सरकार और नगर निगम के कार्यालयों से लेकर तमाम अस्पतालों तक में सुरक्षा के नाम पर यही सिविल डिफेंस के वॉयलेंटियर ही लगाए गए हैं,जो देखने में पुलिस का प्रतिरूप हैं और यह अब केजरीवाल की निजी पुलिस का विकल्प बन चुके हैं। दिल्ली में संवैधानिक रूप से पुलिस केंद्र के अधीन है और केजरीवाल को इस बात की शुरू से कसक रही कि पुलिस उसके अधीन आनी चाहिए। इसीलिए उसने कई बार कई राजनैतिक व कानूनी प्रपंच भी किए ,लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। बाद में इस पार्टी के थिंक टैंक ने दिल्ली सिविल डिफेंस को अपनी पुलिस के रूप में वजूद में लाने की योजना बनाई और उसमें जी भरकर अपने कार्यकर्ताओं की भर्ती करके एक वर्दीधारी फोर्स खड़ी कर ली है। इसमें कई वायलेंटियर तो ऐसे हैं जो अधिकारियों के दलाली भी करते हैं और उनके विरूद्ध कोर्ट में आपराधिक केस भी विचाराधीन हैं।सिविल डिफेंस के नाम पर खड़ी की गई यह फोर्स आम नागरिकों के लिए कम और आम आदमी पार्टी के राजनैतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए अधिक इस्तेमाल की जाती है। अत: अब न्याय के पक्ष में दिल्ली सिविल डिफेंस की उपराज्यपाल को अविलंब उच्च जांच एजेंसी की जांच करवाकर इसके राजनीतिकरण को समाप्त करके नागरिकों का सेवा बल बनाना चाहिए।



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