15/06/2020
विकट परिस्थितियों से लड़ने वाला ही होता है असली नायक ।पलायन कायरता की निशानी।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/रुपहले पर्दे पर नाटकीय जीवन जीना और वास्तविक जीवन जीने में जमीन- आसमान का अन्तर है। यह जरूरी नहीं है कि रंगमंच पर योद्धा और साहसी दिखनेवाले लोग अपने असल जीवन में भी वैसे ही हों।पर्दा किसी भी कलाकार को यश और धन तो दे सकता है ,लेकिन विपरीत परिस्थितियों में जीने का साहस और प्रबल इच्छाशक्ति नहीं । जीवन में आनेवाले उतार -चढ़ाव का सामना करनेवाला और प्रतिकूल परिस्थितियों से संघर्ष करने वाला ही वास्तविक नायक होता है। उसका जीवन ही समाज के लिए आदर्श और अनुकरणीय होता है।उससे ही समाज के दूसरे लोगों को भी लडने और जीने की प्रेरणा मिलती है। जो लोग विकट परिस्थिति में अडिग रहकर उसका सामना नहीं कर पाते और उनसे पलायन करके या घबराकर अपने जीवन का अंत कर ले,वो कायर होते हैं। यह कायर और पलायनवादी न तो समाज के लिए आदर्श हो सकते हैं और न ही नायक । चकाचौंध में विलासिता पूर्ण जीवन जीने वाले इन भोगी कायर जीवों का जीवन अनुकरणीय नहीं होता।अत हमें भी ऐसे लोगों को अपना आदर्श मान कर अपना जीवन नरकीय नहीं बनाना चाहिए। साहसी और संघर्षशील साहसी व्यक्तियों का अनुकरण करने से ही हम सुखी और खुश रह सकते हैं। धन और यश हमें जीवन का वास्तविक आंनद नहीं दे सकता है और न ही संघर्ष करने की क्षमता।



Comments  
  
Name :  
  
Email :  
  
Security Key :  
   2202400
 
     





श्रीराम मंदिर निर्माण ही हमाराअंतिम लक्ष्य नहीं l अपना धर्म/संस्कृति बचाने का संघर्ष जारी रहेगा।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/हमारा सदियों से चलता आ रहा देव स्थान मुक्ति अभियान राम मंदिर के निर्माण तक ही नहीं रुकना चाहिए। पिछली कई शताब्दियों से हमारी संस्कृति और सभ्यता को नष्ट- भ्रष्ट करनेवाली राक्षसी ताकतें आज भी हमें समूल समाप्त करने की साजिशों में लगी हैं। श्री राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए हम लगभग पां


यह कत्ल है या कुर्बानी ? बेजुबान निरिह जीवों की हत्या को हम कैसे मुबारक कहें?

दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/इसे कुर्बानी कहे या कत्ल?हमारी समझ में यह नही आता कि हम बेजुबान,निरिह और मासूम जानवरों का बेरहमी से किए गए कत्ल को मुबारक कैसे माने ?किसी को भी किसी की जान लेने की इजाजत नहीं है, फिर भी किसी को खुश करने के लिए एक ही दिन में करोड़ों जानवरों को मौत के घाट उतार कर हम खुशी मनाते हैंऔर इस काम को


जलियांवाले नरसंहार के दोषी डायर को21 वर्ष बाद उसके घर में सजा देनेवाले उधम सिंह के हम सदा ऋणी रहेंगे।

दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/भारत मां के वीर सपूत शहीद सरदार उधम सिंह जी की पुण्यतिथि पर उनके चरणों में हमारा शत शत नमन। भारत के इस सपूत ने अमृतसर के जलियां वाले बाग में निहत्थे भारतीयों के नरसंहार करवाने वाले पंजाब के गवर्नर जनरल माईकल ओ डायरअंग्रेज को लंदन में उसके घर में जाकर मौत के घाट उतार दिया था। जलियां वा


राममंदिर से मुस्लिमों को दूर रखा जाए। हिन्दुओं ने दी है बड़ी कीमत। इसमें मुस्लिमों का क्या योगदान?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया ) /भगवान श्री राम जी के जन्मस्थान पर भव्य मन्दिर निर्माण हेतु आगामी5 अगस्त को भूमि पूजन के कार्यक्रम की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। कोरोना वायरस के चलते इस ऐतिहासिक समारोह में चाहते हुए भी बहुत से लोग शामिल नहीं हो पाएंगे। कार्यक्रम सीमित अतिथियों की उपस्थिति में प्रधानमंत्री न


दिल्ली सिविल डिफेंस में शामिलआप के वर्करों की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

दिल्ली(अश्विनी भाटिया) /विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जब भी वजूद में आई तब ही उसने दिल्ली सिविल डिफेंस में बड़ी संख्या में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भर्ती किया। पिछले7-8 वर्षों में दिल्ली सिविल डिफेंस में की गई इस पूरी भर्ती की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस बा


कब तक आम आदमी अपनी जान और आबरू को बचाने के लिए गुंडों के हाथों मरता रहेगा?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/बहुत दुखद। बदमाशों को अपनी भांजी से छेड़खानी से रोकने की सजा पत्रकार विक्रम जोशी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। बदमाशों ने सरेआम जोशी को गोलियों से भून डाला। राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के विजयनगर इलाके में बदमाशों के हमले में घायल हुए पत्रकार विक्रम जोशी की मंगलवार देर रात इल


अलवर:जिलाधीश और एस पी पदों पर तैनात हुई महिला अधिकारियों को कड़ी चुनौतियों से निपटना होगा।।

अलवर (अश्विनी भाटिया)/राजस्थान के अलवर जिले की कमान अब महिला अधिकारियों के हाथ में सौंप दी गई है। राज्य सरकार ने जहां जिले के जिलाधीश पद पर 2007 बैच की आईएएस अधिकारी आंनदी को नियुक्त किया है, वहीं पुलिस अधीक्षक के पद की जिम्मेदारी 2013 बैच की भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी तेजस्विनी गौतम को सौंपी है। अलवर पूर्वी राजस


दुशमनों के साथ सीमा पर तो सेना लड़ेगी पर देश के अंदर आर्थिक मोर्चे पर हमें लड़ना होगा।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/इस समय हमारा देश बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। हमें एक ओर जहां कोरोना जैसी महामारी से जूझना पड़ रहा है ,वहीं दूसरी ओर देश के दुश्मन चीन और पाकिस्तान हमारी सीमाओं पर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हैं। देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए और चीनी सैनिकों के धोखेबाजी का मु


विकट परिस्थितियों से लड़ने वाला ही होता है असली नायक ।पलायन कायरता की निशानी।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/रुपहले पर्दे पर नाटकीय जीवन जीना और वास्तविक जीवन जीने में जमीन- आसमान का अन्तर है। यह जरूरी नहीं है कि रंगमंच पर योद्धा और साहसी दिखनेवाले लोग अपने असल जीवन में भी वैसे ही हों।पर्दा किसी भी कलाकार को यश और धन तो दे सकता है ,लेकिन विपरीत परिस्थितियों में जीने का साहस और प्रबल इच्छाशक


दिल्ली के अस्पतालों में इलाज तो दूर पानी देनेवाला कोई नहीं।केंद्र सरकार कब तक मुक दर्शक बनी रहेगी?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/ कोरोना से दिल्ली की बिगड़ी स्थिति को मुकदर्शक बनकर केंद्र सरकार को भी नहीं देखते रहना चाहिए। एक मक्कार,महाझूठे नौटंकीबाज मुख्यमंत्री के राहमो-करम पर जनता को छोड़ देने के कारण देश की राजधानी के लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं जिनको बचाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की भी होती है।केंद