12/06/2020
दिल्ली के अस्पतालों में इलाज तो दूर पानी देनेवाला कोई नहीं।केंद्र सरकार कब तक मुक दर्शक बनी रहेगी?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/ कोरोना से दिल्ली की बिगड़ी स्थिति को मुकदर्शक बनकर केंद्र सरकार को भी नहीं देखते रहना चाहिए। एक मक्कार,महाझूठे नौटंकीबाज मुख्यमंत्री के राहमो-करम पर जनता को छोड़ देने के कारण देश की राजधानी के लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं जिनको बचाने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की भी होती है।केंद्र सरकार को वरिष्ठ डाक्टरों के समूह से दिल्ली को अस्पतालों का निरीक्षण करवाकर सच को अविलंब सामने लाना चाहिए।केजरी सरकार के तो झूठे दावों की पोल खुल चुकी है।सरकार के नकारेपन ने लोगों को मौत के अंधेरे कुएं में धकेल दिया है। आज दिन-प्रतिदिन दिल्ली में कोरोना लोगों को अपना शिकार बनाकर उनकी जिंदगी को समाप्त कर रहा है। केजरी सरकार पूरी तरह से असफल और निकम्मी सरकार साबित हो चुकी है। हालात इतने बिगड़े पड़े हैं कि दिल्ली के शमशान भी दाह -संस्कार के लिए कम पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज तो दूर उन्हे पानी देनेवाला भी कोई नहीं है। निजी अस्पतालों में इलाज के लिए लाखों रुपए चाहिएं जो गरीब जनता के पास नहीं है।अगर केंद्र सरकार भी अपनी ड्यूटी नहीं निभाती तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले का संज्ञान लेकर पहले अस्पतालों का निरीक्षण करवाए। अब सिर्फ गाल बजाने और एक दूसरे पर आरोप लगाने से लोगों का जीवन नहीं बचने वाला। यह बात तो पूरी तरह से साबित हो ही चुकी है कि दिल्ली सरकार ने सिर्फ झूठ बोला और करोड़ों रुपए प्रचार पर खर्च करके जनता को मौत के कुएं में धकेल दिया है। सरकारी अस्पतालों में जो कोरोना संक्रमितों की दयनीय स्थिति है और लाशों की दुर्दशा की जा रही वो इंसानियत को शर्मशार करने वाली है।(वॉयस ऑफ भारत)



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