31/05/2020
प्रचार पर करोड़ों रुपए बहाकर गिरगिट दिल्ली में लड़ रही कोरोना से जंग।परिणाम जनता भुगतेगी।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/ जिन मां-बाप का बेटा नालायक ,झूठा-मक्कार,निठल्ला,कामचोर और उनकी जीवन पूंजी से गुलछर्रे उड़ाना वाला हों तो उनकी मानसिक दशा क्या होगी?इसकाअंदाजा दिल्ली की जनता को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।

दिल्ली का बात -बात पर रंग बदलने वाला बेटा भी करोड़ों रुपए प्रचार पर खर्च करके कोरोना से जंग लड़ने का झूठा दिखावा करने में लगा हुआ है।झूठ-मक्कारी का यह मिश्रण लोगों से कह रहा है कि बीमार होने पर चिंता नहीं करें और वह अपने घरों में रहकर ही अपना कोरोना संक्रमण दूर कर लें ।अर्थात इसका सीधा मतलब है कि उसने अस्पतालों में कोई व्यवस्था नहीं की हुई। उसके महामारी से जनता को बचाने के सभी दावे झूठ का पुलंदा है। सच्चाई भी यही है कि दिल्ली के सरकारी अस्पताल किसी भी मरीज को दाखिल ही नहीं कर रहे और प्राइवेट अस्पताल लाखों रुपए वसूलने में लगे हुए हैं।यह बेटा भी उसी नकारा बेटे की तरह है ,जो मां-बाप के दुख दर्द में उनको उनके हाल पर छोड़ देता है और दूसरों के समझाने पर कहता है कि इसमें उसकी क्या गलती है, उसका सारा दोष पैदा करने वालों पर है। अब जैसा बीज बोयोगे फसल तो वैसी ही होगी। जब दिल्ली ने फ्री बिजली पानी, महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा के लालच में झांसे में आकर मक्कार सेवादार को चुन ही लिया है तो अब वह कोरोना का तौफा भी किसको बांटे क्योंकि उससे लडने का उसमे साहस ही नहीं है। और तो और वह खुद किसी बिल में छुपकर बैठा हुआ है और सिर्फ प्रचार तंत्र का सहारा लेकर कोरोना योद्धा का खिताब जीतना चाहता है।



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