24/05/2020
मीडिया का भारतीय मजदूरों के पलायन और उन्हें अपने देश में ही प्रवासी बताने के पीछे क्या कोई विदेशी साज़िश है?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/अपने ही देश में कोई कैसे प्रवासी हो सकता है? यह भारत के कथित स्वयंभू बुद्धिजीवी पत्रकारों से सीखा जा सकता है। इनमें बहुत से तो विदेशी ताकतों के पेरोल पर पत्रकारिता की आड़ में साजिशें रच रहे हैं और देश के ही अपने मजदूरों को प्रवासी मजदूर साबित करने में जुटे हुए हैं। विदेशी आकाओं को खुश करने के लिए यह लोग देश में पत्रकारों का चौला धारण किए हुए हैं।

 यह बहरूपिए पत्रकार किसी भी सरकार के विरूद्ध जनमत को प्रभावित करने के लिए विदेशी संगठनों से मोटी धनराशि प्राप्त करते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए किए गए लॉक डाउन के कारण काम बन्द हो गया। इससे देश के मजदूरों का महानगरों से अपने गांवों की ओर पलायन करवाने के पीछे भी कई देसी- विदेशी शक्तियों का दिमाग काम करने लगा  है। इन साजिशकर्ताओं का उद्देश्य किसी भी तरह से विश्व में भारत की छवि को धूमिल करना है जिससे विदेशी निवेश यहां न हो पाएऔर भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी पर न आने से रोका जाए।मोदी सरकार को इस महामारी से निपटने में असफल साबित करना भी साजिशकर्ताओं का उद्देश्य है।
लॉक डाउन के दौरान लाखों की संख्या में मजदूरों का सड़कों पर आना भी यूंही सहज सौभविक नहीं था, इसके पीछे भी विदेशी आकायों को खुश करने की मंशा काम कर रही है । इससे विश्व पटल पर भारत की छवि को खराब किया जा सके और उसका फायदा अपने विदेशी आकाओं को पहुंचाया जा सके। परिणामस्वरूप चीन से भागनेवाली विदेशी कम्पनियां भारत में आने से रुक जाएं। यह असली वजह है मजदूरों के पलायन को बढ़ा- चढ़ाकर जोर- शोर से मीडिया का उठाना और अपने देश में ही देश के मजदूरों को प्रवासी मजदूर की संज्ञा देना। आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को पैदा करने की शक की सुईं चीन की ओर उठ रही है। विश्व की आर्थिक व्यवस्था को बर्बाद करने और बड़ी संख्या में जन हानि के लिए चीन घिरता जा रहा है और इसी कारण बहुत सी विदेशी कम्पनियां वहां से अपना कारोबार समेट कर भारत में अपना डेरा डाल सकती हैं। इसलिए चीन बौखलाया हुआ है और उसकी हर संभव यही कौशिश है कि विश्व पटल पर उसकी रिक्तता का फायदा भारत न उठा पाए। भारत में मजदूर संगठनों में वामपंथियों का अच्छा खासा दखल भी है और चीन के इशारे पर वामपंथी यह सारा खेल खेलने में जुट चुके हैं। मजदूरों का पलायन, अपने ही देश में मजदूरों को प्रवासी साबित करना और मीडिया चैनलों का मजदूरों की खबरों को प्रमुखता से दिखाना भी चीन की ही साज़िश का हिस्सा हो सकता है। चीन भारत की सीमा पर भी स्वयं और अपने पिठू पाकिस्तान के माध्यम से नित तनाव पैदा करने की साज़िश में लगा हुआ है। अब तो उसने नेपाल जैसे भारत के सदियों पुराने मित्र को भी सीमा विवाद पैदा करने के लिए उकसाने का काम किया है। कुल मिलाकर चीन सहित कई विदेशी ताकतें भारत के प्रभाव को विश्व में कम करने के लिए साज़िश रचने में लगी हुई हैं। इसी साज़िश के तहत भारत के अंदर मौजूद कई मीडिया, राजनैतिक और मजदूर संगठनों पर हावी लोग भी अपने आकाओं के पेरोल पर अराजकता फ़ैलाने की साजिश में जुटे हुए हैं जिनसे हमें सावधान और सतर्क रहने की आवश्कता है।( वॉयस ऑफ भारत) 



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