07/04/2020
कोरोना वायरस के विरूद्ध चले राष्ट्रव्यापीअभियान को ,क्या केजरीवाल के कारण पलीता लगा है?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया) । देश कॉरोना वायरस के दंश से बहुत बुरी तरह से आहत है ।केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा इस वायरस को रोकने के लिए युद्धस्तर पर चलाए जा रहे अभियान को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजीवाल ने जाने -अंजाने भारी नुकसान पहुंचाने का काम किया है। इस वायरस से सिर्फ टी वी स्क्रीन से ही लडने में लगा केजरीवाल जनता के खून- पसीने के पैसे को विज्ञापन पर खर्च करने में जुटा हुआ है।

उनके इस तरह की नीतियों को देखकर केजरीवाल किस तरह से दिल्ली की जनता का हितैषी कहा जा सकता है? वास्तविकता तो यह है कि इन महाशय ने केंद्र सरकार के इस महामारी से लड़ने वाली लड़ाई को डेंट पहुंचाने का ही काम किया है। पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने लॉक डाउन को नजरंदाज करके हजारों प्रवासी मजदूरों को सड़कों पर उतार कर बीमारी को फैलाने का काम ही किया।अफसोस की बात यह है कि अफवाहों को फ़ैलाने वालों ने सोची समझी साज़िश के तहत दिल्ली से केवल दूसरे राज्यों के मजदूरों का ही पलायन करवाया जबकि विदेशी बंग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए यही जमे रहे? जैसे- तैसे दूसरे राज्यों ने इन अपने- अपने अथक प्रयासों से इन गरीबों को उनके ठिकानों पर पहुंचाया। अभी दिल्ली सड़कों पर उतरे मजदूरों की समस्या से मुक्त ही हुई थी कि निजामुद्दीन मरकज में छुपे हुए हजारों देशी - विदेशी जमातियों को न तो वहां के मौलाना साद ने निकलने दिया और दिल्ली सरकार ने भी इनकी भीड़ को गंभीरता से नहीं लिया। जब मरकज में संक्रमण फ़ैल गया तो सरकार की चिर निद्रा टूटी। पता नहीं दिल्ली प्रशासन ने लॉक डॉउन होने के बावजूद इन तब्लिकि जमतियो को क्यों एकत्र होने दिया? जमति अपने मजहबी अंधविश्वासों के कारण वायरस संक्रमण की चपेट में आ गए। गंभीर स्थिति होने पर इस भीड़ को पुलिस के और केंद्र सरकार की जद्दोजहद के बाद ईलाज के लिए तैयार किया गया।लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी और इन जमातियों में से बहुत से संक्रमण लेकर पूरे देश में फ़ैल चुके थे। इससे केंद्र सरकार कि कोरोना को रोकने के अभियान को राजनीति के चरम को छूने के अति महत्वाकांक्षी केजरीवाल की वजह से पलीता लग चुका था। संक्रमण ने बड़ी संख्या में देश के कोने कोने में पहुंचकर अपना विकराल रूप धारण कर लिया है और अब जन -धन की हानि भी हो रही है। (वॉयस ऑफ भारत)



Comments  
  
Name :  
  
Email :  
  
Security Key :  
   3330
 
     





प्रचार पर करोड़ों रुपए बहाकर गिरगिट दिल्ली में लड़ रही कोरोना से जंग।परिणाम जनता भुगतेगी।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/ जिन मां-बाप का बेटा नालायक ,झूठा-मक्कार,निठल्ला,कामचोर और उनकी जीवन पूंजी से गुलछर्रे उड़ाना वाला हों तो उनकी मानसिक दशा क्या होगी?इसकाअंदाजा दिल्ली की जनता को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।


पत्रकारिता तलवार की धार पर चलना है। पैसे के लिए झूठ-फरेब,चापलूसी करना तो दलाली है।

दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/पहले माना जाता था कि पत्रकार पैदा होता है बनाया नहीं जा सकता और पत्रकारिता करना तलवार की धार पर चलने के समान है। आज के युग में पत्रकार और पत्रकारिता के सभी मायने बदल चुके हैं।हिन्दी पत्रकारिता दिवस की मां सरस्वती के मानस पुत्रों को हार्दिक शुभकामनाएं।आज के ही दिन 30 मई,1826 को पं0 य


दिल्ली के बेटे ने छोड़ा लोगों को भगवान भरोसे। सरकार के निक्कमेपन से कोरोना ने धारण किया रौद्र रुप।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/देश की राजधानी में कोरोना ने अपना खुला तांडव मचाना शुरू कर दिया है।दिल्ली कोरोना संक्रमण के मामले में देश के सभी राज्यों को पछाड़ती हुई अब तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। यहां प्रतिदिन संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। सिर्फ यह रिपोर्ट लिखे जाने के पूर्व के24 घंटों में कोरोना के1024 नए


हिंदुत्व विचारधारा को विकसित करने का श्रेय वीर सावरकर जी को ही जाता है।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में वीर सावरकर जी का नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए था परन्तु कांग्रेस ने हमेशा गांधी नेहरू के अलावा दूसरे आंदोलनकारियों को यह सम्मान नहीं दिया।उनके जीवन का अधिकांश भाग अंग्रेजी शासन में अंडमान निकोबारकी सेल्युलर जेल में ही बी


मीडिया का भारतीय मजदूरों के पलायन और उन्हें अपने देश में ही प्रवासी बताने के पीछे क्या कोई विदेशी साज़िश है?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/अपने ही देश में कोई कैसे प्रवासी हो सकता है? यह भारत के कथित स्वयंभू बुद्धिजीवी पत्रकारों से सीखा जा सकता है। इनमें बहुत से तो विदेशी ताकतों के पेरोल पर पत्रकारिता की आड़ में साजिशें रच रहे हैं और देश के ही अपने मजदूरों को प्रवासी मजदूर साबित करने में जुटे हुए हैं। विदेशी आकाओं को खु


राम जन्मभूमि से मिली प्राचीन मूर्तियां और अवशेष इस्लाम के हिंसक और विध्वंसकारी होने का सबूत। कई और मस्ज़िदों के नीचे भी हो सकते हैं मन्दिर?

दिल्ली (अश्विनि भाटिया)।अयोध्या में राम जन्मभूमि के समतलीकरण के दौरान जमीन के अंदर से बड़ी संख्या में मन्दिर के अवशेष ,देवी - देवताओं की मूर्तियों सहित कई ऐसे प्राचीन वस्तुएं निकली हैं जिनसे यह प्रमाणित होता है कि यहां मन्दिर था।


दिल्ली में सरकार ने शराब पर लगाया भारी टैक्स। क्या पीने वालों से ज्यादा बेचने वाले थे बेचैन?

दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/कोरोना संक्रमण से बेपरवाह शराब को किसी भी तरह से प्राप्त करने की नशेड़ियों की हरकत ने दिल्ली सरकार को यह कदम उठाने को प्रेरित किया।दिल्ली सरकार ने शराब की एम आर पी पर 70 प्रतिशत टैक्स बढ़ाया । लॉक डाउन के कारण पिछले कई दिन से शराब की दुकानें भी बंद थी, इससे पीने वालों को तो दिक्कत का साम


हमें शांति का पाठ पढ़ाने वालों ने यह नहीं बताया कि यह स्थापित कैसे होती है?क्या सिर्फ चमत्कारों के भरोसे बच पाएगा हमारा अस्तित्व?

हमें पिछली कई सदियों से जो धार्मिक शिक्षा दी जा रही है, उस पर चलकर हम कहां से कहां आ गए हैं? आज इस पर भी थोड़ा सा विचार करना आवशयक हो गया है। क्यों हम शांति का जाप करते - आतंक और आतंकियों से घिर गए? हमें यही पढाया जा रहा कुटुंबकम् क्या पूरा विश्व एक परिवार बन पाया ? इसका उत्तर है नहीं। हम विश्व को एक परिवार बनाते बन


सरकार के सभी दावों के बावजूद किसान और उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रही मुनाफाखोर व्यापारियों से मुक्ति। संकट का लाभ उठा रहे कुछ लोग।

दिल्ली (अश्विनी भाटिया )/सरकार के लाख दावों के बावजूद किसानों के सामने यक्ष प्रश्न कि वह अपनी उपज को कैसे बेचे? कोरोना वायरस से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन का फायदा फिर वो वर्ग उठाने में जुट गया है जो खुद को व्यापारी बताता है और काम मुनाफाखोरी का करता है। इस महामारी में जहां इंसानों को मौत से बचने के लिए अपने घर


बाबा साहब के नाम पर सिर्फ वोट बैंक और लाभ लेनेवाले सच्चे अबेड़कर वादी नहीं हो सकते।

दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। बाबा साहब का नाम ले -लेकर भारत के राजनीतिक दलों ने देश की आजादी के बाद से ही अपना वोट बैंक बनायाऔर सफल भी रहे। बाबा साहब का नाम तो सभी ने लिया ,परन्तु उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता किसी ने नहीं समझी। ब