05/04/2018
ओलम्पिक गेम में स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा सपना -हैटट्रिक मेन रैसलर हरप्रीत सिंह संधू

भारत के पहलवानो ने कुश्ती में अपना परचम हमेशा से ही पूरी दुनिया में फहराया है। कुश्ती हमारे देश की संस्कृति में रचा -बसा खेल है जो आदि काल से ही हमारे ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।इस भारतीय खेल को जितना प्रोत्साहन सरकारों द्वारा दिया जा रहा है अगर उसको और अधिक बढ़ा दिया जाये तो हमारे पहलवानों ने विश्व स्तरीय मुकाबले में और अच्छे परिणाम आ सकते हैं। हमारे देश में जितनी लोकप्रियता और सरकारी /गैर सरकारी प्रोत्साहन विदेशी खेल क्रिकेट को मिला है अगर उसका आधा भी हमारे पारम्परिक खेलों -कुश्ती ,कबड्डी और हॉकी को मिलता तो खेल की दुनिया में भारत का नाम सबसे ऊँचा हो सकता था।

कुश्ती  में पंजाब के पहलवानो का दबदबा हमेशा से ही रहा है। 1966 में पंजाब से अलग हुए हरियाणा ने भी इस खेल में आना लोहा पूरी दुनिया से मनवाया है। पंजाब के संगरूर जिले की मूनक तहसील के गांव कडैल के एक किसान परिवार में सन 1993 में जन्मे हरप्रीत सिंह संधू ने कुश्ती में अपनी योग्यता और मेहनत से भारत का नाम कई बार रोशन किया है। हरप्रीत ने एशियाई चैम्पियनशिप मुकाबले में लगातार तीसरी बार कांस्य पदक जीतकर अपना और भारत का दबदबा कायम रखा है। आज रैस्लिंग की विश्व रैंकिंग में हरप्रीत संधू का चौथा स्थान है।  सजगवार्ता डॉट कॉम प्रतिनिधि अश्विनी भाटिया ने हरप्रीत सिंह संधू से एक मुलकात कर विस्तृत बातचीत की। हरप्रीत के दादा श्री बलवंत सिंह जी भी अपने समय के नामी पहलवांन थे और पिता श्री लक्ष्मण सिंह कबड्डी के खिलाडी रह चुके हैं। इस तरह से हम कह सकते हैं कि हरप्रीत को खेल का जूनून उनके खून से ही मिला है। पंजाब से ही स्नातक की पढ़ाई करनेवाले हरप्रीत इस समय पंजाब पुलिस में सब -इंस्पैक्टर के पद पर आसीन हैं। कुश्ती में हरप्रीत के विश्व स्तर पर अब तक के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब सरकार को अविलम्ब उन्हें पुलिस उप अधीक्षक पद पर प्रौन्नति देनी चाहिए। ज्ञात हो कि लगातार तीसरी बार पदक जितने का रिकार्ड भी हरप्रीत के नाम ही है इससे पहले भारत के किसी भी दूसरे पहलवान ने यह करिश्मा नहीं किया है। हरप्रीत बचपन से ही अखाड़े में अपना पसीना बहाने लगे थे और अपनी पढ़ाई के साथ -साथ कुश्ती के भी नए -2 दाव पेच सीखते रहे। 


हरप्रीत ने छात्र जीवन के दौरान ही कई कुश्तियों में विजय हांसिल की और उनका नाम बड़े पहलवानों में शामिल हो गया। इनको सन 2008 पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में विदेशी पहलवानों से लड़ने का अवसर मिला जिसमें उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा। इसके बाद वह  2009 में सब जूनियर ऐशियन कप के 85 किलो वर्ग के मुकाबले में उतरे और उनको सिल्वर मेडल मिला। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उनको रेलवे में सर्विस प्रदान कर दी और 2 वर्ष तक यहां रहने के बाद हरप्रीत को पंजाब सरकार ने 2017 में पंजाब पुलिस में एस आई के पद पर नियुक्ति दे दी। तब से वह राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धायों में पंजाब पुलिस का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।

हरप्रीत कहते हैं कि कुश्ती के लिए शरीर और मस्तिष्क दोनों का स्वस्थ होने के साथ -साथ दोनों का आपसी तालमेल होना भी बहुत अनिवार्य 
होता है। पहलवानॉ के लिए अच्छी और पौष्टिक खुराक के साथ ही अच्छे मार्गदर्शन का होना भी जरूरी है। इसके साथ ही सरकार से भी पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि भी समय -समय पर मिलती रहे ताकि वह मुकाबले में अपने विरोधी को धूल चटा सके। ऐशियन चैम्पियन कुश्ती में पिछली तीन बार से लगातार हरप्रीत तीसरे स्थान पर काबिज हैं।पहली बार उन्होंने थाईलैंड में एशियन चैमियनशिप , दूसरी बार दिल्ली में और अब तीसरी बार किर्गिस्तान में एशियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी हैटट्रिक बनाई।हैटट्रिक का रिकार्ड भी हरप्रित के नाम ही है।हरप्रीत ने 2 बार कॉमन वेल्थ गेम चैम्पियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीते हैं। पहला सन 2016 में सिंगापुर कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप में और दूसरा 2017 में साऊथ अफ्रीका कॉमनवेल्थ गेम चैम्पियनशिप में कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को सम्मान दिलाया है।     

          हरप्रीत भी इस बात को मानते हैं कि हमारे देश में लोगों का क्रिकेट की ओर अधिक रुझान है। इसी कारण बड़ी -बड़ी कंपनियां भी क्रिकेट को प्रोत्साहित करती हैं और आर्थिक मदद भी करती हैं जबकि हमारे परम्परागत खेल इस प्रोत्साहन से वंचित हैं। इनका कहना है कि अगर कुश्ती जैसे खेलों को क्रिकेट की तरह बड़े प्रायोजक मिल जाएँ तो हमारे खिलाडी विश्व पटल पर भारत का डंका बजा सकते हैं। हमारे देश के खिलाडी हर प्राकृतिक वातारवरण में अपना अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि उनका भविष्य में क्या करने का इरादा है तो वह बड़े गंभीर होकर बोले कि उनका सारा ध्यान 2020 में होनेवाले ओलम्पिक खेलों में पदक जीतकर भारत का नाम विश्व ने ऊँचा करना है और वह दिन -रात अपने इसी टारगेट को पाने के लिए जी -तोड़ मेहनत करने में लगे हुए हैं। 


हरप्रीत का कहना है कि भारत के खिलाडियों को विष के दूसरे देशों के खिलाडियों के मुकाबले बेशक कम सुविधाएँ मिलती हैं पर हमारा हौंसला उनसे कहीं अधिक है। उन्होंने इस केंद्र सरकार की नई खेल टॉप नीति को खेलों के प्रोत्साहन के लिए अच्छा बताया है। इस नीति के तहत हर खेल से लगभग 152 शीर्ष खिलाडियों को सूचीबद्ध किया गया है। इनमें से प्रत्येक को हर महीने 50 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय की ओर से दी जा रही है। यह सौभाग्य की बात है कि प्रोत्साहन पानेवाले इन खिलाडियों में कुश्ती से हरप्रीत सिंह संधू का नाम भी शामिल है। हरप्रीत आज के नौजवान लोगों से यह कहना चाहते हैं कि उनको बेकार की बातों को छोड़कर खेलों की ओर ध्यान देना चाहिए इससे एक तो वह स्वस्थ भी रहेंगे और वह गलत व्यसनों से भी बचे रहेंगे। 

                 जब उनसे यह पूछा गया कि उनके साथ ही किर्गिस्तान में हुई एशियन चैम्पियनशिप में पदक जीतनेवाली महिला रैसलर नवजोत कौर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने 5 लाख रूपये के पुरस्कार के साथ पुलिस में डी एस पी पद दिया ,इस पर वह क्या सोचते हैं ? तो उन्होंने इस प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि पंजाब सरकार का यह अच्छा सराहनीय कदम है और वह खुद भी यही अपेक्षा कैप्टन साहब से करते हैं कि उन्हें भी डी एस पी पद पर प्रौन्नति दे दें तो मुझे अति प्रसन्नता होगी। इस प्रोत्साहन से वह स्वयं को ओलम्पिक चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से अधिक मजबूती से तैयार हो पाएंगे। अंत में श्री हरप्रीत संधू ने कहा कि सरकार की ओर से खिलाडियों को दी जा रही सुविधाओं से अच्छे ख़िलाडी उभारने और खेलों का स्तर सुधारने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि खिलाडियों को मिलने वाली पुरस्कार राशि ,पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि समय -समय पर पर्याप्त मात्रा में मिलने से खिलाडियों का मनोबल बढ़ेगा और खेलों में भारत का नाम भी और अधिक चमकेगा।



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ओलम्पिक गेम में स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा सपना -हैटट्रिक मेन रैसलर हरप्रीत सिंह संधू

भारत के पहलवानो ने कुश्ती में अपना परचम हमेशा से ही पूरी दुनिया में फहराया है। कुश्ती हमारे देश की संस्कृति में रचा -बसा खेल है जो आदि काल से ही हमारे ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।इस भारतीय खेल को जितना प्रोत्साहन सरकारों द्वारा दिया जा रहा है अगर उसको और अधिक बढ़ा दिया जाये तो हमारे पहलवानों ने