23/02/2018
मॉडलिंग से शुरू होकर हिंदी फिल्मों में अपने अभिनय कौशल से ऊँचा मुकाम बनाते अभिनेता अमित पुण्डीर

आज के युवा वर्ग में मॉडलिंग को लेकर काफी क्रेज देखा जा रहा है। बहुत से नौजवान मॉडलिंग में कैरियर बनाकर सिनेमा की दुनिया में भी प्रवेश करके एक अच्छा मुकाम हांसिल करने में सफल हुए हैं। इसी क्रम में एक नाम अमित पुण्डीर का भी है जिन्होंने अपना कैरियर मॉडलिंग से शुरू किया और अब फ़िल्मी पर्दे पर भी वह अपने अभिनय कौशल के दम पर एक अमिट छाप दर्शकों के मन -मस्तिष्क में छोड़ने में कामयाब साबित हुए हैं । उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक गांव में सामान्य किसान परिवार में पैदा हुए अमित ने अपनी शिक्षा -दीक्षा भी यहीं से पूरी की है।बीएससी की उपाधि लेकर मॉडलिंग में अपना भाग्य आजमानेवाले अमित ने कई नामी कंपनियों में अपना फोटो शूट दिया है जिनमें मदर डेयरी ,बिग बाजार ,एस बी आई [भारतीय स्टेट बैंक ] के आलावा कई बड़ी स्थापित कंपनियों के वह ऐड मॉडल रहे हैं। मॉडलिंग की दुनिया में अपने 11 वर्ष के सफर में अमित ने लगभग 500 से भी अधिक रैम्प शो किये हैं और अपनी प्रतिभा से अच्छा नाम भी कमाया है। इसके बाद अमित ने भी अपने असली टारगेट को प्राप्त करने के लिए फ़िल्मी नगरी मुंबई की ओर अपने कदम बढ़ा दिए। अपनी ऊँची -लम्बी कद -काठी और आकर्षक व्यक्तित्व का लोहा मनवाने में अमित फ़िल्मी पर्दे पर भी सफल रहे हैं। अमित ने अब तक दो हिंदी फिल्म -मकड़जाल द पॉलिटिक्ल ट्रैप [ Makadjal The Political Trap] और ये है पैरानॉर्मल इश्क [YEH HAI PARANORMAL IISHQ ]में अपनी महत्वपूर्ण अभिनय कला से फ़िल्मी पर्दे पर भी अपना स्थान बना लिया है। भविष्य में कई बड़े प्रोजेक्ट की फिल्मों पर भी अमित को लेकर फिल्मनिर्माता काम कर रहे रहे हैं जो शीघ्र ही प्रदर्शित होंनेवाली हैं और इनमें अमित को एक अलग रूप में दर्शक देखेंगे।

     अभी कुछ दिन पहले सजगवार्ता डॉट कॉम प्रतिनिधि को उनसे एक विस्तृत बातचीत करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस बातचीत के दौरान ही हमें यह भी ज्ञात हुआ कि वह एक अच्छे अभिनेता के साथ -साथ नेक दिल , सौम्य और मधुर वाणी के अच्छे इंसान भी हैं। इस वार्ता के दौरान ही उनके  व्यक्तित्व के कई अनछुये पहलू भी सामने आये। सजगवार्ता प्रतिनिधि अश्विनी भाटिया से अभिनेता अमित पुंडीर की हुई उसी बातचीत के कुछ अंश यहां प्रस्तुत हैं ; 
          अमित का बचपन भी अन्य ग्रामीण बच्चों की तरह खेल -कूद और मस्ती भरा रहा है। उन्होंने बताया कि वो भी बचपन में दूसरे बच्चों की तरह ही पतंग उड़ाने और क्रिकेट खेलने के शौक़ीन रहे हैं। लेकिन उनके मन में शरू से ही कुछ इस अलग तरह का करने का सपना था जो उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि  यानि लीक से अलग हटकर हो। उनके मन के किसी एक कोने में यह प्रबल इच्छा पलती रही कि वह फ़िल्मी पर्दे पर दूसरों को दिखे और लोग उनके अभिनय से उनको भीड़ में भी पहचान लें।उनकी यह दिली इच्छा समय बीतने के साथ -साथ और भी प्रबल होती चली गयी।आख़िरकार उनका यही सपना और मन में पल चुकी प्रबल इच्छा ही अमित को फ़िल्मी दुनिया तक ले आयी। बिना किसी फ़िल्मी पृष्ठभूमि या किसी के आशीर्वाद के अमित इस सपनों की काल्पनिक महानगरी मुंबई में अपना स्थान बनाने में मिली सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं। अमित कहते हैं कि हमारे लिए सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हमारे माता -पिता ही होते हैं जो हमको इस दुनिया में लाते हैं और दुनिया में किस तरह से  रहना -जीना और अपना स्थान बनाना है यह भी सिखाते हैं। अमित अपनी शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत कुछ समय देहरादून में भी रहे। सन 2005 में दैनिक जागरण समाचार पत्र द्वारा आयोजित मॉडलिंग शो -मि.देहरादून कम्पटीशन में शामिल हुए और वह मि देहरादून का ख़िताब जीतने में कामयाब हुए। इसके बाद 2006 में अमित ने मुंबई की फ़िल्मी दुनिया में कदम रख दिए और तब से ही अपने पिता की प्रेरणा और अपनी मेहनत से दिन -रात अभिनय की सीढ़ी चढ़ने में लगे हुए हैं। अमित कहते हैं कि किसी को भी समाज में एक सफल और बड़ा आदमी होने से पहले एक अच्छा -नेकदिल और संवेदनशील इंसान भी होना चाहिए। जो व्यक्ति अच्छा इंसान नहीं है और उसके दिल में दूसरों के दुःख को देखकर कोई टीस नहीं उठती है तो वह उनकी [अमित ] नजर में अच्छा और बड़ा इंसान नहीं हो सकता। 
         अमित को पहली हिंदी फिल्म मकड़जाला ऐ पोलिटिकल ट्रैप में ब्रेक मिला। यह फिल्म 2015 में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में अमित को हीरो यानि मुख्य भूमिका में अपनी अभिनय क्षमता को दर्शकों के सामने लाने का अवसर मिला। इस फिल्म ने अमित की पहचान दर्शोकों में एक स्थापित अभिनेता के तौर पर करवा दी थी।इस  फिल्म में अमित के हीरो के रूप में अदा की गयी भूमिका को दर्शकों की सराहना मिली और एक तरह से कहें तो  उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों की मान्यता मिल गयी। इसके बाद अमित की दूसरी फिल्म थी -ये है पैरानॉर्मल इश्क। इस फिल्म में भी अमित का लीड रोल यानि वह नायक की भूमिका में लोगों को शीग्र देखने को मिलेंगे। इस फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और यह निकट भविष्य में रिलीज होनेवाली है। अमित एक और फिल्म -उन्माद में निगेटिव रोल में शीघ्र ही दर्शकों से रूबरू होंगे। उन्माद फिल्म भी लगभग बनकर तैयार हो चुकी है और जल्द ही प्रदर्शित होनेवाली है। इसके अलावा अमित के पास और कई फिल्म प्रोजेक्ट भी हैं जिनपर शीघ्र ही काम शुरू होनेवाला है।
                          अंत में अमित ने बताया कि उनकी इच्छा है कि वह किसी फिल्म में बड़े गैंगस्टर की भूमिका निभाएँ या फिर कोई इमोशनल फिल्म करें। आज के दौर के बारे में अमित ने कहा कि आज का समय बहुत ही तेजी से परिवर्तनशील होनेवाला और भागमभाग का समय है। सुचना प्रौद्योगिकी क्रांति के कारण बेशक पूरी दुनिया सिमटकर इंटरनेट और स्मार्ट फोन के माध्यम हमारी मुठी में आ चुकी है परन्तु हम अपने रिश्तों से उतने ही दूर होते जा रहे हैं। पहले जहां हम अगर घर से बेशक दूर रहते थे लेकिन फिर भी अपनों के दिल के करीब होते थे। अपनों से मिलने के लिए हमें लम्बा सफर तय करके साक्षात उनसे मिलने जाना पड़ता था और सफर के कष्ट को झेलकर भी अपनों से मिलने के आनंद और उमंग का एक अलग ही अहसास होता था। आज   हम अपनों से हज़ारों कोस दूर होने के बावजूद विडियो कॉलिंग से जब चाहें आमने -सामने होकर बात जरूर कर सकते हैं परन्तु इतना नजदीक होकर भी हमारे दिलों में बहुत दुरी बढ़ चुकी है। सुचना माध्यम के नए -नए यंत्रों के अविष्कार से लाभ तो हुआ है परन्तु इन यंत्रों ने रिश्तों की डोर को पहले से काफी कमजोर भी कर दिया है।
        अमित ने कहा कि ऐतिहासिक चरित्रों और घटनाओं पर फ़िल्में अवश्य बननी चाहियें क्योंकि हम अपने आनेवाली नस्लों को सिनेमा के माध्यम से ही इतिहास की जानकारी दे पाएंगे क्योंकि अब पुस्तकें पढ़ने का कोई चलन समाज में नहीं रहा है। इसका कारण एक तो किसी के पास भी पढ़ने का समय ही नहीं रहा है क्योंकि हमारा सारा समय इंटरनेट और फोन ने कब्जा लिया है। इसलिए सिनेमा ही एकमात्र ऐसा माध्यम बचा है जिसमें फ़िल्में और टीवी सीरियल के द्वारा ही इतिहास को जाना जा सकता है। इसके साथ यह भी जरूरी है कि हम फ़िल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारे फिल्मांकन के दौरान किसी भी ऐतिहासिक चरित्र या तथ्य से कोई छेड़छाड़ या अन्याय न हो जाये क्योंकि सिनेमा में ज्ञान के साथ - साथ मनोरंजन का होना भी आवश्यक अंग होता है जिससे अर्थ का अनर्थ होने की संभावना भी बनी रहती है। जब अमित से यह पूछा गया कि अब उनके सपनो में कौन सी रानी बसी है ? इस प्रश्न पर वह थोड़ा शरमाते हुए कहते हैं कि अभी तो कोई नहीं है। जब कोई होगी तो उसकी जानकारी भी वह हमें जरूर देंगे। इसके साथ ही हम अमित पुंडीर के उज्ज्वल भविष्य और यह उन्नति की कामना करते हैं कि भगवान उनको अभिनय के क्षेत्र में उन्नति के शिखर पर आसीन करें। 



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