15/12/2017
कड़ी मेहनत- सच्ची लगन और मानसिक तैयारी से ही हम अपने लक्ष्य को भेद सकते हैं -गौरव वासुदेव

मुंबई माया नगरी शुरू से ही देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। इस नगरी में पुरे देश से नौजवान फ़िल्मी पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का सपना लेकर जाते हैं। इनकी तादाद हजारों नहीं लाखों में भी हो सकती हैं लेकिन इस भीड़ में से कुछ गिनती के लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं।

इन सौभाग्यशाली युवाओं में से एक नाम हम  गौरव वासुदेव का भी ले सकते हैं जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की है और अपनी अभिनय कला को निखारने के लिए घोर तप भी किया। बेशक वह छोटे पर्दे पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो चुके हैं  मगर वो कहते हैं कि उनकी मंजिल अभी दूर है और उसको पाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।गत  दिनों गौरव वासुदेव के साथ सजग वार्ता डॉट कॉम की ओर से अश्विनी भाटिया की हुयी एक मुलाकत में उनके जीवन से जुडी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। यहां उसी बातचीत के आधार पर लिखित यह रिपोर्ट प्रस्तुत है ;
                  पंजाब की सांस्कृतिक राजधानी माने जानेवाले जालंधर में सन 1987 को एक साधारण परिवार में जन्में गौरव वासुदेव कहते हैं कि जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे तो उन्होंने तभी से ही अभिनय के क्षेत्र में काम करने की इच्छा मन में पाल ली थी जो वक्त के साथ -साथ और प्रबल होती चली गयी। वह कहते हैं कि उनके परिवार से कोई भी सदस्य पहले इस क्षेत्र में नहीं रहा।2008 में कॉलेज में पढ़ते हुए वह थियेटर से जुड़ गए और यह जुड़ाव ही उनकी अभिनय की दुनिया में आने का प्रवेश द्धार बना।
                     

              स्टार न्यूज में भी कुछ दिन काम करने के बाद उन्होंने कई टेली फिल्मों और विज्ञापन फिल्मों में काम किया। कुछ नाट्य रूपांतरों में भी काम कर चुके गौरव कहते हैं कि मैं अभिनय की दुनिया में अलग -अलग तरह की भूमिकाओं में खुद को जीते हुए देखना पसंद करूंगा। गौरव क्लर  टी वी चैनल पर प्रसारित हुए धारावाहिक उतरन जैसे प्रसिद्ध टी वी  सीरियल में भूमिका निभा चुके हैं। अभी हाल में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बने सीरियल पौरस में गौरव को काम करने का मौका मिला है। इसकी शुरआत में ही गौरव को एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली जिसको उन्होंने बड़ी खूबसूरती से अदा किया है। जी टी वी पर प्रसारित महाराजा रणजीत सिंह धारावाहिक में एक ब्रिटिश की भूमिका निभानेवाले वासुदेव ने इश्कबाज़ सीरियल में एक सिख युवक की भूमिका को बड़े सुंदर तरीके से निभाकर दर्शकों में अपनी खास पहचान बना ली है।ज़ी -टीवी चैनल पर सिन्दबाज़ जिन्दाबाज़  में भी गौरव वासुदेव महत्वपूर्ण किरदार का रोल निभा चुके हैं। इसी तरह से बाल -कृष्ण में भी गौरव को दर्शक एक महत्वपूर्ण भूमिका में देखेंगे। अगले महीने यानि जनवरी 2018 लाँच होनेवाले नये टीवी चैनल डिस्कवरी जीत पर एक धारावाहिक बैटल ऑफ़ सारागढ़ी में भी गौरव वासुदेव को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखा जायेगा। 
         
गौरव ने बताया कि केंद्र सरकार ने जब एक हज़ार और पांच सौ के पुराने नोटों के चलन पर रोक लगा दी तो एक टी वी विज्ञापन में उनको कश्मीरी युवक के रूप में प्रस्तुत किया गया था।इस विज्ञापन में निभाई गई मेरी भूमिका इतनी सशक्त थी कि उसके प्रसारित होने पर मुझे देश के कई अलग -अलग कोणों से दर्शकों की गलियां भी सुनने को मिली। दर्शकों की ओर से मिली इन गलियों से मैंने यह समझ लिया कि मेरे अभिनय को लोगों ने गंभीरता से लिया है जो किसी भी कलाकार के लिए पारितोष से कम नहीं समान समझा जाना चाहिए। 
छोटे पर्दे से दर्शकों के बीच अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुके गौरव यह भी कहते हैं कि उनको अभी और कड़ी मेहनत करनी है क्योंकि कड़ी मेहनत ही हमको अपना लक्ष्य पाने के नजदीक ले जाती है। गौरव कहते हैं वह अभिनय के क्षेत्र में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज़ करवाना चाहते हैं कि जिससे मेरे

 दर्शक मुझसे अगाध प्रेम करने लगे और मेरे पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनाये रखें। वह कहते हैं कि वैसे तो उन्हें हर तरह की भूमिकाएं निभाने में आनंद आता है लेकिन फिर भी मैं आक्रामक भूमिकाओं को निभाने में खुद को निभाए जानेवाले पात्र [किरदार ]के ज्यादा समीप और अनुकूल पाता हूँ।  
गौरव भी बड़े पर्दे पर अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन करने को बेताब हैं और उनको कई प्रस्ताव भी मिल रहे हैं परन्तु एक कम्पनी के साथ किये गए अनुबंध के कारण अभी वह अपनी स्वेच्छा से कहीं भी अभिनय करने को स्वतंत्र नहीं हैं। वह युवाओं को संदेश देते हैं कि कड़ी मेहनत और सच्ची लग्न के साथ मानसिक तैयारी करके ही अपने द्वारा निर्धारित लक्ष को पाया जा सकता है आधी -अधूरी मेहनत और तैयारी के साथ हमें कुछ भी प्राप्त होनेवाला नहीं है। गौरव का कहना यह भी है कि किसी भी काम में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को कभी भी उतावला नहीं  होना चाहिए इससे मानसिक कुंठा भी पैदा हो सकती है जो असफल होने पर हमें अपने मार्ग से विचलित क्र सकती है। हम अपने मार्ग से भटक न सकें तो इसलिए हमें किसी काम  सफलता तक पहुंचने के लिए संयम बरतना चाहिए। संयम से हम अपने लक्ष्य को पाने में  हमें एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है जो हमें अपने नए मुकाम पर ले जाने को प्रेरित भी करती है।



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कड़ी मेहनत- सच्ची लगन और मानसिक तैयारी से ही हम अपने लक्ष्य को भेद सकते हैं -गौरव वासुदेव

मुंबई माया नगरी शुरू से ही देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। इस नगरी में पुरे देश से नौजवान फ़िल्मी पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का सपना लेकर जाते हैं। इनकी तादाद हजारों नहीं लाखों में भी हो सकती हैं लेकिन इस भीड़ में से कुछ गिनती के लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं।