राष्ट्रीय
श्रीराम मंदिर निर्माण ही हमाराअंतिम लक्ष्य नहीं l अपना धर्म/संस्कृति बचाने का संघर्ष जारी रहेगा।
दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/हमारा सदियों से चलता आ रहा देव स्थान मुक्ति अभियान राम मंदिर के निर्माण तक ही नहीं रुकना चाहिए। पिछली कई शताब्दियों से हमारी संस्कृति और सभ्यता को नष्ट- भ्रष्ट करनेवाली राक्षसी ताकतें आज भी हमें समूल समाप्त करने की साजिशों में लगी हैं। श्री राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए हम लगभग पांच सौ साल तक लडे और लाखों लोगों ने अपना जीवन भी कुर्बान कर दिया ,तब जाकर हम कोर्ट से इसको मुक्त करवाने में सफल हुए। यह हमारी पहली विजय है और यही विजय यात्रा हमको मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी में बाबा विश्वनाथ सहित अन्य देव स्थानों को मुक्त करवाने तक जारी रखनी होगी। हमारा संकल्प दृढ़ रहना चाहिए और संघर्ष करने की शक्ति क्षीण नहीं होनी चाहिए। श्री राम मंदिर के निर्माण के प्रारम्भ होने के साथ ही जो अधर्मी ताकतें इसको ध्वस्त करने की धमकियां दे रही हैं, उनके मजहब ने उन्हें यही सिखाया है कि दूसरे धर्मों को तलवार के बल पर ख़तम कर दो और उनके देवालयों को तोड़कर अपनी इबादतगाह बना डालो। हम और हमारा धर्म बेशक हमें दूसरों का अपमान और उन पर अन्याय करने की शिक्षा नहीं देता पर हमें अपमान और अन्याय सहकर चुप बैठने को भी नहीं कहता। अधर्मी और अन्यायी ताकतों से हमारे देवी- देवता और अवतार अपने -अपने समय में उनसे लडे भी और उनका विनाश भी करके माने। हमारे दिल में अगर अपने देवताओं और अपने अवतारों-श्री राम-श्री कृष्ण के प्रति तनिक भी श्रद्धा है तो,हमें भी इन आसुरी शक्तियों और हिंसक ताकतों से लडना ही होगा ।अपना धर्म, राष्ट्र और संस्कृति को बचाने का हमारा जो संघर्ष पिछले 13 सौ वर्षों से चल रहा है, उसको भविष्य में भी अनवरत तब तक जारी रखना होगा जब तक इन अत्याचारी, हिंसक और अधर्मी आसुरी ताकतों का हम समूल नाश न कर देते। इसी में हमारी श्री राम की आराधना है, इसी में श्री की भक्ति है और इसी में भोले बाबा की पूजा है। जय भवानी ।जय श्री राम। जय श्री कृष्णा। ओम नमो शिवाय।( वॉयस ऑफ भारत)
यह कत्ल है या कुर्बानी ? बेजुबान निरिह जीवों की हत्या को हम कैसे मुबारक कहें?
दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/इसे कुर्बानी कहे या कत्ल?हमारी समझ में यह नही आता कि हम बेजुबान,निरिह और मासूम जानवरों का बेरहमी से किए गए कत्ल को मुबारक कैसे माने ?किसी को भी किसी की जान लेने की इजाजत नहीं है, फिर भी किसी को खुश करने के लिए एक ही दिन में करोड़ों जानवरों को मौत के घाट उतार कर हम खुशी मनाते हैंऔर इस काम को पुण्य कार्य सम्झते हैं।यह तो सार्वभौमिक सच्चाई है कि कुर्बानी हमेशा से कमजोरों की ही दी जाती रही है। क्या कभी शेर की कुर्बानी देने की हिमाकत कोई कर सकता है? तो इसका जवाब न में ही होगा। कुर्बानी के नाम पर किए गए कत्लों को आप कुछ भी कहें, लेकिन हम तो इसे कमजोर बेजुबान जीवों के प्रति किया गया अपराध ही कहेंगे। जो लोग और संगठन जीवों पर किए जाने वाले अत्याचार पर हो हल्ला मचाते हैं और मीडिया भी दिवाली पर की गई आतिश्बाज़ी को वायु प्रदुषण कह कर शोर मचाता है और बेजुबान जानवरों को कत्ल किए जाने पर उनको साँप क्यों सूंघ जाता है ?कथित रूप से खुद को सर्वशक्तिमान कहलवाने वाला अपनी बनाई सृष्टि के कमजोरों का रक्त बहाने से खुश होता है,तो अंदाज़ा अपनी बुद्धि से लगा लो कि वह कैसे सृष्टि निर्माता होगा? खैर हम तो हिंसा में विश्वास नहीं रखते क्योंकि हमारी संस्कृति और धर्म में ऐसा हमको नहीं सिखाया गया है।
जलियांवाले नरसंहार के दोषी डायर को21 वर्ष बाद उसके घर में सजा देनेवाले उधम सिंह के हम सदा ऋणी रहेंगे।
दिल्ली(अश्विनी भाटिया)/भारत मां के वीर सपूत शहीद सरदार उधम सिंह जी की पुण्यतिथि पर उनके चरणों में हमारा शत शत नमन। भारत के इस सपूत ने अमृतसर के जलियां वाले बाग में निहत्थे भारतीयों के नरसंहार करवाने वाले पंजाब के गवर्नर जनरल माईकल ओ डायरअंग्रेज को लंदन में उसके घर में जाकर मौत के घाट उतार दिया था। जलियां वाले बाग में मारे गए सैंकड़ों अपने बहिन -भाइयों की नृशंस हत्या का बदला लिया था। इस वीर सपूत का भारतीय समाज सदैव ऋणी रहेगा। सरदार उधमसिंह 13अप्रैल, 1919को घटित जालियाँवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे। राजनीतिक कारणों से जलियाँवाला बाग में मारे गए लोगों की सही संख्या कभी सामने नहीं आ पाई। इस घटना से वीर उधमसिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियाँवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। अपने मिशन को अंजाम देने के लिए उधम सिंह ने विभिन्न नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की। सन् 1934 में उधम सिंह लंदन पहुँचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। वहां उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार खरीदी और साथ में अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी खरीद ली। भारत का यह वीर क्रांतिकारी माइकल ओ डायर को ठिकाने लगाने के लिए उचित वक्त का इंतजार करने लगा। उधम सिंह को अपने सैकड़ों भाई-बहनों की मौत का बदला लेने का मौका 1940 में मिला। जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद 13 मार्च ,1940 को रायल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हाल में बैठक थी जहां माइकल ओ डायर भी वक्ताओं में से एक था। उधम सिंह उस दिन समय से ही बैठक स्थल पर पहुँच गए। अपनी रिवॉल्वर उन्होंने एक मोटी किताब में छिपा ली। इसके लिए उन्होंने किताब के पृष्ठों को रिवॉल्वर के आकार में उस तरह से काट लिया था, जिससे डायर की जान लेने वाला हथियार आसानी से छिपाया जा सके। बैठक के बाद दीवार के पीछे से मोर्चा संभालते हुए उधम सिंह ने माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दीं। दो गोलियां माइकल ओ डायर को लगीं जिससे उसकी तत्काल मौत हो गई। उधम सिंह ने वहां से भागने की कोशिश नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी। उन पर मुकदमा चला। 4 जून ,1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई, 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।(वॉयस ऑफ भारत)
राममंदिर से मुस्लिमों को दूर रखा जाए। हिन्दुओं ने दी है बड़ी कीमत। इसमें मुस्लिमों का क्या योगदान?
दिल्ली (अश्विनी भाटिया ) /भगवान श्री राम जी के जन्मस्थान पर भव्य मन्दिर निर्माण हेतु आगामी5 अगस्त को भूमि पूजन के कार्यक्रम की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। कोरोना वायरस के चलते इस ऐतिहासिक समारोह में चाहते हुए भी बहुत से लोग शामिल नहीं हो पाएंगे। कार्यक्रम सीमित अतिथियों की उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों द्वारा संपन्न होगा। सोशल मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कोई मुस्लिम भी पैदल राम जी की ननिहाल से मिट्टी लेकर आ रहा है जो पूजन में शामिल होगा और उसके द्वारा लाई गई मिट्टी नीव में डाली जाएगी। हमें यह समझ नहीं आ रहा कि सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने का पूरा बोझ यह हिन्दू अपने सिर पर ही क्यों लिए फिरता है? इस बात को पूरा विश्व जानता है कि हिन्दुओं ने अपने आराध्य श्री राम जन्मभूमि को मुक्त करवाने के लिए पिछले5 सौ वर्ष संघर्ष किया और लाखों ने अपने प्राणों की आहुति भी दी। जेहादी आतंकी मुस्लिमों ने इस पवित्र मन्दिर को बाबर के निर्देश पर 5 सौ वर्ष पूर्व ध्वस्त करके इस पर बाबरी मस्जिद का निर्माण कर लिया था। काफी संघर्षों के बाद1992 में हिन्दुओं बाबरी नामक कलंक को साफ कर दिया। कई दशकों तक कानूनी लड़ाई इस मंदिर के निर्माण हेतु हिन्दुओं ने लड़ी है और मुसलमानों ने हर कदम पर इसकी राह में बाधाएं ही उत्पन्न की। कुछ कट्टरपंथी आतंकी मुस्लिमों ने खून खराबा करने तक की धमकियां भी दी। मुस्लिमों को हिन्दू समाज ने कई बार इस बात का प्रस्ताव भी दिया कि वह इस पवित्र भूमि से अपना दावा छोड़ दें तो हिन्दू उनको दूसरी जगह अपने खर्चे से विशाल मस्जिद बनाकर दे देंगे। परंतु इस कट्टर मुस्लिम संप्रदाय ने कोई उदारता का परिचय नहीं दिया और हर संभव कोशिश की कि यह पवित्र भूमि हिन्दुओं को न मिले।अंत में देश के सर्वोच्च न्यायालय से हिन्दू पक्ष केस जीतकर मन्दिर निर्माण की राह प्रशस्त कर पाया है, इसमें मुस्लिमों का कोई भी योगदान नहीं है। जिस भी मुस्लिम को श्री राम में आस्था है और वह खुद को उनका भक्त समझता है तो वह सर्वप्रथम इस्लाम की त्याग कर सनातन धर्म में वापसी करे और प्रमाण दे कि उसे राम में आस्था है। जिस मजहब में अल्लाह के अलावा कोई दूसरा पूजनीय नहीं हो सकता और जो अपने अनुयायियों को मूर्तियों को तोड़ने का आदेश देता हो उसके अनुयायियों की आस्था मन्दिर में नहीं हो सकती। ऐसी मजहबी शिक्षा पर चलने वाले मुस्लिमों को मन्दिर निर्माण में शामिल करके इतिहास में जगह देने की किसी भी कोशिश को हिन्दू समाज सहन नहीं कर सकता। श्री राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी निभानेवाली समिति/न्यास और भूमिपूजन समारोह के आयोजकों को भूमि पूजन से मुस्लिमों को दूर रखना चाहिए। ज्यादा उदारता हमारी कमजोरी बनी। जिस मुस्लिम की राम में आस्था है तो पहले उसे हिन्दू बनाओ और फिर उसको भूमि पूजन में शामिल होने का अवसर दो। यह बात हिन्दू समुदाय सहन नहीं कर सकता कि मन्दिर मुक्ति संघर्ष में गोली खाएं हिन्दू, जेल जाए हिन्दू और भूमि पूजन में इतिहास में नाम दर्ज करवाएं मुस्लिम जिनका मन्दिर के आंदोलन में कोई योगदान नहीं है। अब हमारे कुछ नेताओं और धर्माचार्यों को अगर हिन्दुओं को उदार साबित करने का पाखंड करना है तो हम सब उसके खिलाफ हैं। (वॉयस ऑफ भारत)
टॉप न्यूज़
श्रीराम मंदिर निर्माण ही हमाराअंतिम लक्ष्य नहीं l अपना धर्म/संस्कृति बचाने का संघर्ष जारी रहेगा।
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राममंदिर से मुस्लिमों को दूर रखा जाए। हिन्दुओं ने दी है बड़ी कीमत। इसमें मुस्लिमों का क्या योगदान?
दिल्ली सिविल डिफेंस में शामिलआप के वर्करों की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।
कब तक आम आदमी अपनी जान और आबरू को बचाने के लिए गुंडों के हाथों मरता रहेगा?
अलवर:जिलाधीश और एस पी पदों पर तैनात हुई महिला अधिकारियों को कड़ी चुनौतियों से निपटना होगा।।
दुशमनों के साथ सीमा पर तो सेना लड़ेगी पर देश के अंदर आर्थिक मोर्चे पर हमें लड़ना होगा।
विकट परिस्थितियों से लड़ने वाला ही होता है असली नायक ।पलायन कायरता की निशानी।
दिल्ली के अस्पतालों में इलाज तो दूर पानी देनेवाला कोई नहीं।केंद्र सरकार कब तक मुक दर्शक बनी रहेगी?
संपादक का नजरिया
दिल्ली सरकार के कोरोना से बचाव के खोखले दावों की सिपाही अमित की मौत ने उड़ाई धज्जियां।
दिल्ली (अश्विनी भाटिया)/ देश की राजधानी में एक ओर कोरोना संक्रमण तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां की लचर चिकित्सा प्रणाली भी जवाब देती जा रही है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार के हवाई दावों की पोल तो दिल्ली पुलिस के कोरोना से संक्रमित सिपाही अमित राणा की मौत से भी खुल गई है।महामारी से बचाव के लिए लोगों की सेवा में लगे इस कर्मवीर को समय पर कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई और यह अकाल ही मौत के मुंह में समा गया। इस कर्मवीर को हम सलाम करते हैं और राजधानी की प्रशासनिक लापरवाही की निंदा भी करते हैं।
दिल्ली एन सी आर
गीता भवन में हॉऊस - टैक्स कैम्प में बड़ी संख्या में लोगों ने पैनल्टी माफ़ी योजना का लाभ उठाया।
शाहदरा [रमन भाटिया ] यहां गीता भवन ,भोलानाथ नगर में 2 फरवरी को पूर्वी दिल्ली नगर निगम के शाहदरा दक्षिणी जॉन के सम्पत्ति कर विभाग द्वारा कर संग्रह हेतु एक दिवसीय कैम्प लगाया गया। यह कैम्प शाहदरा वार्ड के निगम पार्षद और पुदिननि में सदन नेता श्री निर्मल जैन ने जनता की सुविधा के लिए लगवाया । ज्ञात हो कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम द्वारा हॉऊस टैक्स के बकायादारों पर पिछले बकाया पर लगनेवाला ब्याज और पेनल्टी माफ़ योजना शुरू करके टैक्स जमा करवाने का जन अभियान शुरू किया हुआ है।
उत्तरी दिननि ठेकेदारों की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करेगा- तिलक राज कटारिया
दिल्ली (अ. भा.) उत्तरी दिल्ली नगर निगम अपने नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में अब कोई भी बाधा नहीं आने देगा। यह आश्वासन स्थायी समिति के अध्यक्ष तिलक राज कटारिया ने निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में निगम ठेकेदारों के साथ एक बैठक के बाद कही। श्री कटारिया ने कहा कि पिछले लम्बे समय से वित्तीय संकट के कारण निगम के ठेकेदारों के किये गए काम का भुगतान न होने के कारण विकास कार्य भी अवरुद्ध हुए पड़े थे।इससे जनता को भी नागरिक सुविधाओं से वंचित होना पद रहा था।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम में करोड़ों की अवैध उगाही पर अधिकारी और पार्षद मौन क्यों ?
शाहदरा [ सजगवार्ता ] पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अभियंताओं और अधिकारियों की खुली लूट के आगे जहां जनता विवश है वहीं निगम पार्षद नत मस्तक हुए पड़े हैं। इस स्थानीय निकाय के अंतर्गत शाहदरा उत्तरी और शाहदरा दक्षिणी जोन आते हैं और दोनों ही जोनो में कार्यरत अधिकारी मालामाल हैं जबकि दूसरी और सरकारी कोष में सफाई कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पर्याप्त धन न होने का रोना लगातार रोया जा रहा है।
तात्कालिक मुद्दा
कांग्रेस का पटेलों को आरक्षण देने का क्या फार्मूला है स्पष्ट क्यों नहीं करती ?
गुजरात में विधानसभा का चुनावी घमासान धीरे -धीरे बढ़ता जा रहा है।कांग्रेस यहां जातिवादी जहर फैलाकर चुनावी लाभ उठाना चाहती है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य होने के कारण लगता नहीं की वो अपने मंसूबे में कामयाब हो पाएगी। इस चुनाव में भाजपा पुरे लाव -लश्कर के साथ उतर चुकी है और किसी भी तरह की कमी वो नहीं छोड़ना चाहती है। पटेल समुदाय को आरक्षण दिलाने के नाम पर हार्दिक पटेल कांग्रेस की नाव में सवार हो चुके हैं और इस बात का दावा करते घूम रहे हैं की इस बार गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनेगी और पटेल समुदाय को आरक्षण देगी। अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस कैसे पटेल समुदाय को आरक्षण देगी क्योंकि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है ? कांग्रेस को और विशेष रूप से इसके युवराज राहुल गाँधी को इस बात का जवाब देना ही चाहिए कि आरक्षण देने का उनका फार्मूला क्या है ?
विशेष
आज भी हिन्दू व मन्दिर असुरक्षित क्यों ?और मुस्लमान आक्रामक और बेखौंफ क्यों ?
दिल्ली/(अश्विनी भाटिया) सदियों पहले मौहम्मद बिन कासिम की भारत में घुसपैठ के साथ हिन्दूओं और उनके देव स्थानों पर जो हमले शुरू हुये वो आज तक जारी हैं ।हिन्दू सदियों से इस्लामिक बर्बरता का शिकार होता आया है और आज भी यह आतंकी सिलसिला निरंतर जारी है ।हिन्दू इस्लाम के असली घिनौने चेहरे को कल भी नहीं पहचान पाया था और आज भी नहीं पहचान पा रहा ।दौरान हिन्दुओं ने अपनी मूर्खता और सहनशीलता के कारण अपना, अपने धर्म और अपने राष्ट्र का बहुत नुकसान किया, लेकिन उसने इन सब बातों से कोई सबक नहीं सीखा ।
कुश्ती के साथ -साथ छोटे पर्दे पर भी खास मुकाम बना रहे हैं पवन दलाल
आज कुश्ती के क्षेत्र में भारत विश्व पटल पर एक ऊँचा मुकाम रखता है। कुश्ती और बॉक्सिंग में हरियाणा -पंजाब के खिलाडियों ने देश को एशियाई और ओलम्पिक खेलों में मैडल जीतकर भारत की प्रतिष्ठा को बचाया है। हरियाणा में हर छोटे -बड़े गांव की मिट्टी में पहलवान तैयार किये जा रहे हैं और सरकार भी इस ओर आर्थिक मदद देकर खिलाडियों को प्रोत्साहन देने में लगी हुयी है। TEST
कड़ी मेहनत- सच्ची लगन और मानसिक तैयारी से ही हम अपने लक्ष्य को भेद सकते हैं -गौरव वासुदेव
मुंबई माया नगरी शुरू से ही देश के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। इस नगरी में पुरे देश से नौजवान फ़िल्मी पर्दे पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने का सपना लेकर जाते हैं। इनकी तादाद हजारों नहीं लाखों में भी हो सकती हैं लेकिन इस भीड़ में से कुछ गिनती के लोग ही अपना सपना साकार कर पाते हैं।
अपराध
दिल्ली की चौपट होती कानून -व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौंसले को कौन संभालेगा ? गृहमंत्री राजनाथ जी।
दिल्ली [अश्विनी भाटिया]  देश की राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ समय से कानून -व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। आये दिन लूटपाट ,चोरी और मारपीट की घटनाएं तो एक तरफ खुनी गैंगवार की घटनाएं का ग्राफ भी बहुत ऊपर की ओर चढ़ता जा रहा हैं। दिल्ली में पुलिस सीधे -सीधे उपराजयपाल के माध्यम से केंद्रीय गृहमंत्री के नियंत्रण में है।आश्चर्य की बात यह है कि गृहमत्री सहित देश का पूरा केंद्रीय शासन और प्रशासन भी दिल्ली में होने के बावजूद अपराधियों पर लगाम कसने में पुलिस तंत्र फ़ेल साबित हो रहा है। अगर देश की राजधानी में कानून -व्यवस्था चौपट हो रही है तो शेष देश के स्थिति कैसी होगी यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। देश की आधे से ज्यादा समस्याएं पुलिस की दूषित और भ्रष्ट कार्यप्रणाली की दें हैं।
सिनेमा
कामयाबी हेतु लग्न और कड़ी मेहनत के साथ -साथ टैलेंट भी होना जरूरी है -मॉडल एवं डायरेक्टर सुमित शर्मा
आज युवाओं में एक्टिंग और मॉडलिंग में अपना कैरियर बनाने का जनून सिर चढ़ कर बोल रहा है। इस क्षेत्र में नाम के साथ -साथ पैसा भी कमाया जा सकता है। यही कारण है कि आज का युवा इस फिल्ड में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पुरे जोश -खरोश से अपने कदम बढ़ा रहे हैं। एक अच्छे मॉडल के लिए खूबसूरत चेहरे के साथ -साथ कसरती शरीर और टैलेंट का होना भी बहुत जरूरी है होता है।अधिकांश मॉडल यही चाहते हैं कि वह भी फ़िल्मी दुनिया में प्रवेश पाकर शिखर पर पहुंचे और लोगों में उनकी एक अलग पहचान बने। इनमें से कुछ ही भाग्यशाली लोग होते हैं जो अपने बड़े सपने साकार करने में कामयाब हो पाते हैं।
मॉडलिंग से शुरू होकर हिंदी फिल्मों में अपने अभिनय कौशल से ऊँचा मुकाम बनाते अभिनेता अमित पुण्डीर
आज के युवा वर्ग में मॉडलिंग को लेकर काफी क्रेज देखा जा रहा है। बहुत से नौजवान मॉडलिंग में कैरियर बनाकर सिनेमा की दुनिया में भी प्रवेश करके एक अच्छा मुकाम हांसिल करने में सफल हुए हैं। इसी क्रम में एक नाम अमित पुण्डीर का भी है जिन्होंने अपना कैरियर मॉडलिंग से शुरू किया और अब फ़िल्मी पर्दे पर भी वह अपने अभिनय कौशल के दम पर एक अमिट छाप दर्शकों के मन -मस्तिष्क में छोड़ने में कामयाब साबित हुए हैं । उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के एक गांव में सामान्य किसान परिवार में पैदा हुए अमित ने अपनी शिक्षा -दीक्षा भी यहीं से पूरी की है।बीएससी की उपाधि लेकर मॉडलिंग में अपना भाग्य आजमानेवाले अमित ने कई नामी कंपनियों में अपना फोटो शूट दिया है जिनमें मदर डेयरी ,बिग बाजार ,एस बी आई [भारतीय स्टेट बैंक ] के आलावा कई बड़ी स्थापित कंपनियों के वह ऐड मॉडल रहे हैं। मॉडलिंग की दुनिया में अपने 11 वर्ष के सफर में अमित ने लगभग 500 से भी अधिक रैम्प शो किये हैं और अपनी प्रतिभा से अच्छा नाम भी कमाया है। इसके बाद अमित ने भी अपने असली टारगेट को प्राप्त करने के लिए फ़िल्मी नगरी मुंबई की ओर अपने कदम बढ़ा दिए। अपनी ऊँची -लम्बी कद -काठी और आकर्षक व्यक्तित्व का लोहा मनवाने में अमित फ़िल्मी पर्दे पर भी सफल रहे हैं। अमित ने अब तक दो हिंदी फिल्म -मकड़जाल द पॉलिटिक्ल ट्रैप [ Makadjal The Political Trap] और ये है पैरानॉर्मल इश्क [YEH HAI PARANORMAL IISHQ ]में अपनी महत्वपूर्ण अभिनय कला से फ़िल्मी पर्दे पर भी अपना स्थान बना लिया है। भविष्य में कई बड़े प्रोजेक्ट की फिल्मों पर भी अमित को लेकर फिल्मनिर्माता काम कर रहे रहे हैं जो शीघ्र ही प्रदर्शित होंनेवाली हैं और इनमें अमित को एक अलग रूप में दर्शक देखेंगे।
बॉडी बिल्डिंग में मिस्टर वर्ल्ड -2018 का ख़िताब पाना ही मेरा सपना -राजीव खन्ना
आजकल युवावर्ग में जिम जाकर बॉडी बनाने का जनून काफी बढ़ता जा रहा है।कई तो घंटों पसीना बहाकर अपनी बॉडी को आकर्षक आकार देकर मॉडलिंग की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। बहुत से युवा अपनी दमदार और आकर्षक बॉडी के दम पर ही कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड अम्बेस्डर बन चुके हैं। बॉडी बिल्डिंग के शो भी कहीं न कहीं आयोजित होते हैं जिसमें शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता में भी वह अपने शरीर का प्रदर्शन करके सम्मान प्राप्त करते हैं। बॉडी बिल्डर,न्यूट्रिशन , जिम ट्रेनर और इंटरनेशनल फिटनेस मॉडल राजीव खन्ना का नाम मॉडलिंग की दुनिया में काफी लोकप्रिय हो चुका है।
खेल
ओलम्पिक गेम में स्वर्ण पदक जीतना ही मेरा सपना -हैटट्रिक मेन रैसलर हरप्रीत सिंह संधू
भारत के पहलवानो ने कुश्ती में अपना परचम हमेशा से ही पूरी दुनिया में फहराया है। कुश्ती हमारे देश की संस्कृति में रचा -बसा खेल है जो आदि काल से ही हमारे ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।इस भारतीय खेल को जितना प्रोत्साहन सरकारों द्वारा दिया जा रहा है अगर उसको और अधिक बढ़ा दिया जाये तो हमारे पहलवानों ने विश्व स्तरीय मुकाबले में और अच्छे परिणाम आ सकते हैं। हमारे देश में जितनी लोकप्रियता और सरकारी /गैर सरकारी प्रोत्साहन विदेशी खेल क्रिकेट को मिला है अगर उसका आधा भी हमारे पारम्परिक खेलों -कुश्ती ,कबड्डी और हॉकी को मिलता तो खेल की दुनिया में भारत का नाम सबसे ऊँचा हो सकता था।
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